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लिवर सिरोसिस -एक चुनौती

पिछले दो से तीन दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था में एक ओर बदलाव आया है, वहीं दूसरी ओर बदलते सामाजिक परिवेश का गहरा असर भारतीय जनमानस के स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। शिथिल सा जीवन, अधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी एवं सी (काला पीलिया ) ने जिगर (लिवर) सम्बंधित बीमारियों को अधिक जटिल बना दिया है। 
अगर इन बीमारियों की शुरुआती स्तर ही जाँच कर इलाज कर दिया जाये तो लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।
Q. लिवर सिरोसिस क्या है ?
A . लिवर अर्थात् जिगर, सिरोसिस अर्थात् जिगर का हमेशा के लिए खराब हो जाना। सामान्यतः लिवर एक मुलायम अंग मन जाता है, परन्तु विभिन्न  कारकों से धीरे-धीरे सख्त हो जाता है, जिससे यह अन्य अंगों पर भी अपना दुष्प्रभाव दर्शाता है।
Q . लिवर सिरोसिस के कारण क्या हैं ? 
A . अधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी एवं हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया ), ऑटोइम्म्यून हेपेटाइटिस इत्यादि प्रमुख कारक हैं।
Q . लिवर सिरोसिस के लक्षण क्या हैं ?
A . थकान, शरीर में कमजोरी, पीलिया, पेट पर सूजन अथवा पेट में पानी भरना, शरीर में खून की कमी, खून की उल्टी, हल्की बेहोशी, तिल्ली का बढ़ना इत्यादि।
Q . लिवर सिरोसिस कितने प्रकार का होता है ?
A . लिवर सिरोसिस को दो भागों में बांटा जा सकता है COMPENSATED तथा DECOMPENSATED ।  COMPENSATED CIRRHOSIS  में मरीज को थकान, खून की कमी इत्यादि के लक्षण पाए जाते हैं, जबकि DECOMPENSATED CIRRHOSIS में पेट में पानी भरना, खून की उल्टी, काले रंग के दस्त, गहरा पीलिया, बुखार आना, बेहोशी, पेशाब का कम आना इत्यादि देखा जाता है। कुछ मरीजों में लिवर सिरोसिस धीरे-धीरे लिवर कैंसर में भी परिवर्तित हो सकता है।
Q . लिवर सिरोसिस का दूरगामी परिणाम (Prognosis) क्या होता है ?
A . लिवर सिरोसिस अगर शुरुआती स्थिति में पकड़ में आ जाये तो मरीज एक दशक से अधिक समय तक जीवित रह सकता है, परन्तु अगर मरीज को देर से इसका पता लगे तो जीवन काल 2 से 3 साल तक ही सीमित रह सकता है।
 
Q . लिवर सिरोसिस के मरीजों में एंडोस्कोपी का (दूरबीन के द्वारा पेट की जाँच ) क्या महत्व है ?
A . लिवर सिरोसिस के अधिकतर मरीजों में एंडोस्कोपी के द्वारा भोजन नली के निचले हिस्से में फूली हुई नसें (Esophageal varices) पाई जाती हैं,  जिनमें रक़्त रिसाव की संभावना बहुत प्रबल रहती है। अगर इसका उपचार समय पर करवाया जाये तो खून की उल्टी एवं अस्पताल में भर्ती होने सी बचा जा सकता है। साधारण भाषा में कहा जाये तो समस्या की रोकथाम से मरीज को आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है।
Q . लिवर सिरोसिस का इलाज क्या है ?
A . इसका इलाज दो प्रकार से संभव है, एक तो केवल दवाइयों के द्वारा तथा दूसरा लिवर बदलने अर्थात् लिवर ट्रांसप्लांट के द्वारा।
Q . लिवर सिरोसिस से किस प्रकार बचा जा सकता है ?
A. हमारे जिगर को हानि पहुंचाने वाले तत्व जैसे शराब, अधिक चिकनाई के प्रयोग से बचना चाहिए। हेपेटाइटिस बी एवं सी की सामान्य जाँच एवं समय पर इलाज से काफी हद तक बचा जा सकता है।
Q . लिवर सिरोसिस का इलाज किस डॉक्टर/चिकित्सक से करवाएं ? 
A . लिवर सिरोसिस के इलाज हेतु पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि इस प्रकार के मरीजों को विशेष परामर्श एवं सघन इलाज की आवश्यकता होती है ?
 
Q . क्या ये बीमारी उन लोगों में भी हो सकती है, जो न शराब का सेवन करते हैं तथा न ही हेपेटाइटिस बी अथवा सी से ग्रसित हैं ?
A . NAFLD ( Non Alcoholic Fatty Liver Disease) एक ऐसी बीमारी है, जो कि विशेष तौर पर मोटापे, Sedentary Lifestyle (शिथिल जीवनयापन) जैसे विशेष कारकों वाले लोगों में पाई जाती है। आपने सुना भी होगा कि व्यक्ति ने कभी शराब का सेवन नहीं किया तथा पहले से  कोई बीमारी न होते हुए भी लिवर ख़राब हो गया। यह बीमारी भारत में बहुत तेजी से  बढ़ रही है।
 
                                                                        -डॉ. सत्यार्थ चौधरी 
                                                               

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तम्बाकू अर्थात जहर की खेती

तम्बाकू यानी निकोटियाना स्पीसीज, साल 1616 के बाद भारत इससे परिचित हुआ । 4 लाख हेक्टेयर में भारत वर्ष में तम्बाकू की खेती होती है और तकरीबन 700 लाख टन उत्पादन भी होता है अतः ऐसा कहा जाता है कि पूरे विश्व का 10 प्रतिशत तम्बाकू उत्पादन करने वाला हिस्सा भारत में आता है । या हम कह सकते हैं कि 9.9 प्रतिशत तम्बाकू का उत्पादन भारत में होता है । तम्बाकू से होने वाले कैंसर रोगियों कि संख्या भारत में सबसे अधिक है । क्या आप जानते हैं एक सिगरेट पीने वाला मनुष्य अपने जीवन से 11 साल ख़त्म कर देता है । एक सिगरेट मनुष्य के जीवन से 5.5 मिनट छीन लेती है । मनुष्य जब सिगरेट का एक कश अपने फेफड़ों की ओर खींचता है तो उस कश से 4000 रसायन निकलते हैं,  जिसमे से 43 रसायन कैंसर कारक होते हैं । भारत में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल प्रमुख तम्बाकू उत्पादक राज्य हैं । दक्षिण अमेरिका को तम्बाकू का जन्मस्थान माना जाता है । तम्बाकू का वानस्पतिक नाम 'निकोटियाना' है । निकोटियाना नाम फ्रांस के राजदूत 'जॉन निकोट' के नाम पर रखा गया । 1500 करोड़ रूपये हर साल केंद्रीय उत्पादन कर के रूप में और 675 करोड़ रूपये विदेशी मुद्रा के रूप में निर्यात से मिलते हैं लेकिन तम्बाकू से लाभ की अपेक्षा हानि ज्यादा होती है । सिगरेट में तम्बाकू की मात्रा पर ध्यान केंद्रित किया जाए तो 25 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश की आवश्यकता पड़ती है । जबकि अन्य तम्बाकू पदार्थों में लगभग 150 किलोग्राम नाइट्रोजन की आवश्यकता पड़ती है । निकोटियाना टूबेकम को देशी तम्बाकू कहते है । इसे पूरे देश में तकरीबन 80% हिस्से में उगाते है । इनके पौधों की पत्तियां चौड़ी, लम्बी और फूलों का रंग गुलाबी होता है । इससे प्राप्त तम्बाकू को बीड़ी, सिगरेट, सिगार, हुक्का आदि में इस्तेमाल करते हैं । इनके पौधों की पत्तियों में निकोटिन की मात्रा 0.5 - 5.25% होती है और दूसरी तम्बाकू की किस्म का नाम निकोटियाना रस्टिका है । इसमें तम्बाकू की मात्रा 11% होती है । इन पौधों पर हल्की, छोटी पत्तियां और पीले फूल पाए जाते हैं । इससे प्राप्त तम्बाकू का इस्तेमाल हुक्के में, सूंघने में व चाबने में किया जाता है । शरद ऋतु में इस वर्ग की फसल अच्छी होती है ।

 

31 मई को हर वर्ष तम्बाकू निषेध (कार्यक्रम) दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग जागरूक हो सकें व तम्बाकू के सेवन से सैदेव दूरी बनाकर रखें या फिर जो लोग इसका सेवन करते हैं, वे तुरंत इसका सेवन बंद करें । भारत सरकार की ओर से अनेक कदम उठाए जा रहे हैं जिसे जागरूकता अभियान का नाम दिया गया है । टीवी पर, रेडियो के द्वारा बार-बार विज्ञापन देकर लोगों से अपील की जाती है और उनके माध्यम से तम्बाकू के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों को भी बताया जाता है । विश्व स्वास्थय संगठन (डब्ल्यूएचओ) के द्वारा वर्ष 1980  में 31वें स्थान पर धूम्रपान के विषय को स्वास्थय सूची में रखा गया और जिसकी थीम थी "धूम्रपान और स्वास्थय चुनाव आपका है" । तब से लेकर अब तक अनेक सरकारों द्वारा तम्बाकू के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने के कदम समय-समय पर उठाये जा रहे हैं ।

 

                                     निधि भड़ाना  

Worst Child Labour

Child labour is a complex problem on the earth. There is no place which is free from of child labouration. In India, the problematic area of child labour has very close to alarming position. Do you know that, the children are forced fully work as bonded labourers to pay family debts to money-lenders? In India, recently a report explained that, the rural areas children migrated to area of industries for employment and generates income. Under age of 14, children are doing
work in factories or in small companies. Children making carpet, booms and many other different works on little amount of pay.

Analysis to Situation of Child Labour
As per report of International Labour Organization (ILO) 317 million children are involved in work of labour today, and around 126 million of children out of 317, are come in under line of child exploitation. Not only that, around 5.7 million children are debt slaves. I am highlight the main cause of child labouration problematic area is that, every year 22000 children are die in accidents on the job place. As survey report explained, 59 million children (boys and girls) are in age of between 5 to 14 only in India. Poverty is a high causes of child labour. The number of self employed child labourers increased with the implementation of child labor action law. Exploitation exists in all sectors of economy. Child labour has a social, cultural, economical and political root of causes and this is interlinked with county in mental and physical development of health.
How we country people support to reduces child labour
1. First stop hiring below the minimum age children.
2. Educate society, educate parents, educate family, friends etc.
3. Always identify the age of employees.
4. Carry out risk assessment product.
5. Over the last many decades, India put in place a range of laws of (child labour) and many
programs to address the actual problem of child labouration.
6. Under privileged children affected lots with child slavery in India so, one should take
initiatives to stop child labour.
7. Government made laws and explained in section 3 of the right of children, compulsory education and free public education, 2009. Next in Section 3 of Child Prohibition and Regulation Act explained, minimum age of child hazardous.

                                                    

                                            - Nidhi Bhadana                       

Mission Indradhanush

The Government of India launched the scheme of mission “Indradhanush” to prevent all children and the pregnant women. This is the scheme which determined to save the life of every child and the pregnant women. The mission of “Indradhanush” aims to protect against 7 vaccine preventable diseases like 1. Protect Against Tetanus 2. Protect Against Polio 3. Protect Against Tuberculosis 4. Protect Against Measles 5.  Protect Against Hepatitis B 6. Protect Against Diphtheria 7. Protect Against Pertussis. The program has been launched in December 25, 2014 by union health minister J.P. Nadda. The main focus is to immunize pregnant women and children. The mission Indradhanush involves 352, districts (279 mid district + 33 North East states + 40 districts missed out children detected). In every year 2.6 crore children are born in India and according to world health report near around 11.4 lakh die before completed their age of five and this is all because of many preventable causes. Mission Indradhanush, aim is to achieve fully immunizing in all total 352, districts children and the pregnant women. The Government of India decides that 2014 till to 2020 the mission of “Indradhanush” should be complete. Government of India increases people’s awareness through television advertisement, radio and campaign programs. This is noted, the life expectancy increased during the last period from 63.5 till to 67.9. This is sound good for country’s people. J.P. Nadda says, till 2020, we will build a healthy India. On time to time Prime Minister Modi spread the awareness of mission Indradhanush.

Real Facts

  1. The high challenges for country is to face continue huge child death and disability. So, for that prospective the mission Indradhanush scheme generated.
  2. Villagers should knows the beneficiaries of this mission Indradhanush because, people should need to knows the beneficiaries of mission to protect the life of children and women.
  3. The scheme aim at improving the health facilities and protect the life of new born children.
  4. As we can see the 7 beautiful colors of the rainbow, aims to protect 7 types of vaccine prevented disease. On a first phase do high focus 201 districts where near around 50% of unvaccinated children.
  5. Under the mission, the Government of India, aims to develop good health for country’s people and develop structure a good quality of life.

                                         

                                                                 - Nidhi Bhadana